तीन कृषि विधेयक बिल: कितना बंजर- कितना उपजाऊ

Written By Avinash Sharan

25th September 2020

तीन कृषि विधेयक बिल (AGRICULTURAL BILLS): क्या है प्रावधान और क्यों हो रहा विरोध ?

 कृषि विधेयक बिल: कितना बंजर- कितना उपजाऊ

कृषि विधेयक बिल 2020: कितना बंजर- कितना उपजाऊ

पिछले दिनों सरकार तीन कृषि विधेयक बिल लोक सभा और राज्य सभा में पारित कर चुकी है। इस कृषि विधेयक बिल को लेकर दोनों ही सदनों में हंगामा मचाया गया।  इस बिल को लेकर एक और  विपक्ष सरकार पे निशाना साध रही है तो  वहीँ दूसरी और सरकार उन्हें किसानो के हित वाला कृषि विधेयक बिल बता रही है।

आखिर क्या है इस तीन कृषि विधेयक बिल की असलियत :

ये बिल ठीक उसी प्रकार का है जैसे कि एक डॉक्टर किसी नवजात रोते हुए बच्चे को इंजेक्शन लगाता है।  देखने वालों को ऐसा लगता है जैसे कि डॉक्टर कितना निर्दयी है लेकिन डॉक्टर को ये पता है कि ये इंजजेक्शन बच्चे की भलाई के लिए कितना आवश्यक है। ये बिल किसानों के लिए कुछ इसी प्रकार का बिल है। https://shapingminds.in/agriculture-ii-a…-board-questions/ हो सकता है कि इससे किसानों को लाभ पहुँचे।  ये भी हो सकता है कि इससे किसानों को नुक्सान हो। आखिर पिछले 70 वर्षों से किसानो को कौन सा लाभ मिल रहा था ? https://shapingminds.in/agriculture/ मगर इतना तो तय है कि जमाखोरों और बिचौलियों को इससे कोई लाभ नहीं मिलने वाला है।

 तीन कृषि विधेयक बिल के नाम क्या हैं ?

कृषि विधेयक बिल 2020

       कृषि विधेयक बिल 2020

१. कृषक उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020 (Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Bill, 2020.)

२. कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020, Farmers (Empowerment and Protection) Agreement of Price Assurance and Farm Services Bill, 2020.

३. आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक -2020, The Essential Commodities (Amendment) Bill

 

पहला कृषि विधेयक बिल

१. कृषक उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020 Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Bill, 2020.)

क्या हैं मुख्य प्रावधान-

  • सरकार किसानों को उनकी उपज के विक्रय (बिक्री) की स्वतंत्रता प्रदान करते हुए ऐसी व्यवस्था का निर्माण करने का प्रयास कर रही है, जहां किसान एवं व्यापारी कृषि उपज मंडी के बाहर भी उत्पादों का सरलतापूर्वक व्यापार कर सकें.
  • किसानों  को  राज्य के भीतर एवं बाहर, देश के किसी भी स्थान पर अपनी उपज बिना किसी रुकावट बेचने के लिए अवसर एवं व्यवस्थाएं प्रदान करने का प्रयास
  • परिवहन लागत (TRANSPORTATION COST) एवं कर (TAX) में कमी लाकर किसानों को उनके उत्पाद की अधिक से अधिक कीमत दिलाने का प्रयास।
  • ई-ट्रेडिंग (E-TRADING) के जरिये किसानों को उपज बिक्री के लिए ज्यादा सुविधाजनक तंत्र उपलब्ध कराना।
  • मंडियों के अतिरिक्त व्यापार क्षेत्र में, कोल्डस्टोरेज, वेयर हाउस, प्रसंस्करण यूनिटों (PROCESSING UNIT) पर भी व्यापार की स्वतंत्रता देना
  • किसानों का रिटेलरों से  सीधा संपर्क बनाना।  (बिचोलिये/.MIDDLEMAN) से बचाने का प्रयास।

किसानों और व्यापारियों की आशंकाएं:

  • सरकार द्वारा न्यूनतम मूल्य समर्थन (MSP) प्रणाली समाप्त हो जाएगी.
  • कृषक यदि पंजीकृत कृषि उत्पाद बाजार समिति-मंडियों के बाहर बेचेंगे तो मंडियां समाप्त हो जाएंगी जिससे कई लोग बेरोज़गार हो जायेंगे।
  •  सरकारी ई ट्रेडिंग (e-trading) पोर्टल का क्या होगा ?

समाधान: सरकार की तरफ से आश्वासन 

  • एमसपी (MSP) पूर्व की तरह जारी रहेगी।
  • मंडिया समाप्त नहीं होंगी, वहां पूर्ववत व्यापार होता रहेगा.
  • मंडियों में ई-नाम (e-NAM) ट्रेडिंग व्यवस्था भी जारी रहेगी.
  • इलेक्ट्रानिक प्लेटफार्मों पर कृषि उत्पादों का व्यापार बढ़ेगा. पारदर्शिता के साथ समय की बचत होगी.

दूसरा कृषि विधेयक बिल

२. कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020, Farmers (Empowerment and Protection) Agreement of Price Assurance and Farm Services Bill, 2020.

क्या हैं मुख्य प्रावधान-

  • कृषकों को व्यापारियों, कंपनियों, प्रसंस्करण इकाइयों (processing units), निर्यातकों से सीधे जोड़ना.
  •  कृषि करार (contract farming) के माध्यम से बुवाई से पूर्व ही किसान को उपज के दाम निर्धारित करना.
  • बुवाई से पूर्व किसानों  को मूल्य का आश्वासन और कीमत बढ़ने पर न्यूनतम मूल्य के साथ किसानों को अतिरिक्त लाभ.
  • बाजार की अनिश्चितता से कृषकों को बचाना अर्थात मूल्य पहले से ही तय हो जाने से बाजार में कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव का विपरीत  प्रभाव किसान पर नहीं पड़ेगा.
  • किसानों तक अत्याधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी, कृषि उपकरण एवं उन्नत खाद-बीज पहुंचाना
  • किसी भी विवाद की स्थिति में उसका निपटारा 30 दिनों के अंदर स्थानीय स्तर पर करना.
  • कृषि के क्षेत्र में शोध (Research) एवं नई तकनीकी (New Techniques) को बढ़ावा देना.

किसानों और व्यापारियों की आशंकाएं:

  • अनुबंधित कृषि समझौते में किसानों का पक्ष कमजोर होगा, वे कीमत निर्धारित नहीं कर पाएंगे
  • छोटे किसान कैसे कांट्रेक्ट फामिर्ंग करने में हो सकती है परेशानी।
  • किसानों को इस नए सिस्टम से परेशान होगी।
  • विवाद की स्थिति में बड़ी कंपनियों को लाभ मिलेगा।

समाधान: सरकार की तरफ से आश्वासन 

  • किसान को अनुंबध में पूर्ण स्वतंत्रता रहेगी, वह अपनी इच्छा के अनुरूप दाम तय कर उपज बेचेगा. उन्हें अधिक से अधिक 3 दिन के भीतर भुगतान प्राप्त होगा.
  • देश में 10 हजार कृषक उत्पादक समूह निर्मित किए जा रहे हैं. ये एफपीओ छोटे किसानों को जोड़कर उनकी फसल को बाजार में उचित लाभ दिलाने की दिशा में कार्य करेंगे।
  • अनुबंध के बाद किसान को व्यापारियों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होगी. खरीदार उपभोक्ता उसके खेत से ही उपज लेकर जा सकेगा.
  • विवाद की स्थिति में कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने की आवश्यक्ता नहीं होगी. स्थानीय स्तर पर ही विवाद को सुलझाने की व्यवस्था की जायेगी।

तीसरा कृषि विधेयक बिल

3. आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक -2020

क्या हैं मुख्य प्रावधान-

  • अनाज, दलहन, तिलहन, प्याज एवं आलू आदि को अत्यावश्यक वस्तु की सूची से हटाया जाना।
  • अपवाद की स्थिति, (जिसमें कि 50 प्रतिशत से ज्यादा मूल्य वृद्धि शामिल है), को छोड़कर इन उत्पादों के संग्रह की सीमा तय नहीं की जाएगी.
  • इस प्रावधान से कृषि क्षेत्र में निवेश (Investment) को बढ़ावा मिलेगा.
  • कीमतों में स्थिरता आएगी, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Healthy competition) की शुरुआत होगी।
  • देश में कृषि उत्पादों के भंडारण (store) एवं प्रसंस्करण (Processing)की क्षमता में वृद्धि होगी.
  • भंडारण क्षमता वृद्धि से किसान अपनी उपज सुरक्षित रख सकेगा एवं उचित समय आने पर बेच पाएगा.

क्या हैं किसानों और व्यापारियों की आशंकाएं –

  • बड़ी कंपनियां आवश्यक वस्तुओं का भंडारण करेगी. उनका हस्तक्षेप बढ़ेगा.
  • कालाबाजारी या जमाखोरी बढ़ सकती है.

समाधान- सरकार की तरफ से आश्वासन 

  • निजी निवेशकों को उनके व्यापार को चलाने  में अत्यधिक हस्तक्षेपों की आशंका दूर हो जाएगी. इससे कृषि क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ेगा.
  • कोल्ड स्टोरेज (cold storage) एवं खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) के क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ने से किसानों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिल पाएगा.
  • फसल खराब होने की आंशका से किसान दूर होगा.
  • एक सीमा से ज्यादा कीमते बढ़ने पर सरकार के पास पूर्व की तरह नियंत्रण की सभी शक्तियां मौजूद रहेंगी।
  •  भ्रष्टाचार समाप्त होगा.

निष्कर्ष :

तीन कृषि विधेयक: आशा की किरण

      तीन कृषि विधेयक: आशा की किरण

किसी भी विधेयक की सही परीक्षा तो तब हो पाएगी जब वह सही ढंग से लागू की जाये। सही नीति और सही नीयत से अगर इसे लागू किया जाए तो किसानों के साथ -साथ देशवासियों का भी भला होगा।

बदलाव की स्थिति में लोगों के मन में भय होना भी लाज़मी है जिसके कारण लोग सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

देखना ये है कि ये नया विधेयक किसानों की स्थिति को बेहतर बनाने में कितना मददगार साबित होता है।

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