पृथ्वी की गतियां

Written By Avinash Sharan

26th January 2021

पृथ्वी की गतियां – कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान (भूगोल) अधयाय 3

(भूगोल) अधयाय 3 - पृथ्वी की गतियां 

     (भूगोल) अधयाय 3 – पृथ्वी की गतियां 

पृथ्वी की गतियां – कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान (भूगोल ) अधयाय-3 – नामक एक पाठ है।
पाठ बहुत ही सरल है।  मगर TEXTBOOK में इतने कठिन  शब्दों और वाक्यों का प्रयोग किया गया हैं कि छठवीं के बच्चों को तो क्या बड़ों के लिए भी समझना आसान नहीं होगा। अंग्रेजी में MOTIONS OF THE EARTH और हिंदी में “पृथ्वी की गतियां “ का सीधा सा मतलब है कि पृथ्वी किस प्रकार घूमती है।  “पृथ्वी की गतियां – कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान (भूगोल) अधयाय 3 में  इसी के बारे में चर्चा की गयी है।
हम सिर्फ इस पाठ को पढ़ेंगे ही नहीं बल्कि इसे आसान शब्दों में समझने का प्रयास भी करेंगे।  एक बार पाठ समझ में आ जाये तो फिर उसके प्रश्न-उत्तर भी आसानी से कर लेंगे।
तो शुरू करते हैं
कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान (भूगोल ) अधयाय 3 – पृथ्वी की गतियां “अक्षांश और देशांतर रेखाएँ”
श्रोत : एन सी ई आर टी  
कक्षा  : 6 
विषय  : भूगोल 
अधयाय 3 – पृथ्वी की गतियां 

पृथ्वी की गतियां पाठ को पढ़ने का उद्देश्य

१. घूर्णन और परिक्रमण के बारे में जानना।
२. घूर्णन और परिक्रमण से क्या होता है – यह जानना।
३. तकनीकि शब्दों जैसे प्रदीप्ति वृत्त, उपसौर, अयनांत इत्यादि को जानना।

पृथ्वी की गति

पृथ्वी की गति का मतलब  है पृथ्वी का घूमना।
क्या तुम्हे लगता है कि पृथ्वी घूमती है ?
मुझे तो नहीं लगता?
क्योंकि अगर पृथ्वी घूमती तो हमें घूमती हुई दिखाई भी तो देती।
पर हमें तो पृथ्वी एक जगह रुकी हुई दिखती है।
फिर कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान (भूगोल) अधयाय 3 – में पृथ्वी की गतियां जैसा पाठ क्यों है?
क्या पुस्तक में गलत बात लिखी हुई है या फिर टीचर क्लास में गलत बताते हैं।
इस ब्लॉग में हमलोग यही जानने का प्रयास करेंगे कि पृथ्वी आखिर घूमती है भी या नहीं?
अगर घूमती है तो कैसे ?

पृथ्वी दो तरीके से घूमती है:

1. घूर्णन (ROTATION) – अपनी धुरी पर घूमना: 

क्या तुमने किसीको BASKET  BALL अपनी ऊँगली पर घुमाते हुए देखा है।
ज़रूर देखा होगा।
जिस ऊँगली पर BALL घूम  रहा है अगर उसी ऊँगली को बॉल के अंदर डालकर ऊपर से निकाल दिया जाये तो वह ऊँगली BALL का अक्ष (AXIS) कहलाएगी।
ठीक उसी प्रकार पृथ्वी भी अपने स्थान पर घूमती है।
इसी को हिंदी में घूर्णन और अंग्रेजी में ROTATION कहा जाता है।
तो पहला तरीका पृथ्वी के घूमने का वो होता है जिसमे पृथ्वी अपने ही अक्ष पर गोल-गोल घूमती है।
परन्तु हमें उसका अक्ष दिखाई नहीं पड़ता।
आपको अक्ष की कल्पना करनी  पड़ती है इसलिए इसे काल्पनिक रेखा कहते हैं।
पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है।
उसे एक चक्कर लगाने में 24 घंटे (23 घंटे 56 मिनट और 4.09 सेकेंड) लगते हैं।
घूर्णन (ROTATION) की वजह से ही पृथ्वी पर दिन और रात होते हैं https://einsty.com/din-aur-raat-kyu-hota-hai-in-hindi/

२. परिक्रमण (REVOLUTION) – सूर्य के चारों ओर घूमना:

पृथ्वी दूसरे तरीके से भी घूमती है।
यह तरीका पहले वाले तरीके से अलग होता है।
इसमें पृथ्वी विशाल सूर्य के चारों और घूमती है। 
इस प्रकार के घूर्णन को हिंदी में परिक्रमण और अंग्रेजी में REVOLUTION कहते हैं।
विशाल सूर्य के चारों ओर घूमना कोई मामूली बात नहीं है।
पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर लगाने में 365 दिन (365 दिन 6 घंटे 48 मिनट और 45.51 सेकेंड) लग जाते हैं।
पृथ्वी जब सूर्य की परिक्रमा करती है तो उसके किसी भाग पे तेज़ धूप तो किसी भाग पे हलकी धूप पड़ती है।
इसी की वजह से मौसम बदलते हैं।

क्या पृथ्वी घूर्णन और परिक्रमण ((ROTATION &REVOLUTION) एक साथ करती है?

कई लोगों के मन में ये प्रश्न भी ज़रूर आता होगा।
अपनी जगह पर घूमना और उसके साथ-साथ सूर्य के चारों और भी घूमना।
क्या पृथ्वी दोनों काम एक साथ कर सकती है ?
तो इसका जवाब है हाँ।
पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमते हुए सूर्य की भी परिक्रमा करती है।

क्या होगा यदि पृथ्वी घूर्णन (ROTATION) करना बंद कर दे ?

अगर पृथ्वी घूमना बंद कर दे - पृथ्वी की गतियां

       एक भाग में दिन और एक भाग में रात

मान लीजिये कि आप रात के अँधेरे में एक सड़क पे खड़े हैं।
ठीक सामने एक मोटरसाईकल खड़ी है जिसकी रौशनी आपके ऊपर पड़  रही है।
तो ऐसे में क्या होगा ?
चूंकि आप ठीक रौशनी के सामने खड़े हैं इसलिए आपका सामने का भाग तो दिखाई देगा मगर आपकी पीठ किसी को नज़र नहीं आएगी क्योंकि रौशनी सामने है पीछे नहीं।
अब आप पीछे घूम जाईये।
अब पीछे का भाग दिखाई देगा मगर सामने का नहीं।
इसी प्रकार अगर पृथ्वी घूमना (घूर्णन) बंद कर दे तो उसका भी  जो  भाग सूरज की तरफ रहेगा वहां हर वक़्त दिन होगा।
मगर पृथ्वी के पीछे वाले भाग में तो हर वक़्त अँधेरा ही रहेगा।
अर्थात जिन देशों पे सूर्य की रौशनी पड़ेगी वहां तो हर वक़्त दिन ही रहेगा।
और जिन देशों पे रौशनी नहीं पड़ेगी वहां हर वक़्त रात ही रहेगी। ऐसी स्थिति में पृथ्वी का एक हिस्सा अत्यधिक गर्म और दूसरा अत्यधिक ठंडा होगा।
ऐसे में पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं हो पायेगा.
इसलिए पृथ्वी का घूमना ज़रूरी है ताकि सभी देशों में दिन और रात हो।WHAT IS SOLAR SYSTEM?

पृथ्वी की गति जिससे होती है दिन और रात:

पृथ्वी की वो गति जिससे दिन और रात होती है उसे घूर्णन कहते हैं।
सूर्य गैस का एक गोला है जो लगातार जलता रहता है।
वह एक ही जगह स्थिर भी है।
पृथ्वी संतरे के सामान गोल है और अपने अक्ष पर घूमती भी रहती है।
तो, पृथ्वी का वो भाग जहाँ से सूरज दिखाई देता है वहां दिन होता  है।
जब पृथ्वी घूम जाएगी और आपको सूर्य दिखना बंद हो जाएगा तो समझ लीजिये रात हो गयी है।
इस प्रकार हर 24 घंटे में दिन और रात होती है।

ऋतु परिवर्तन: पृथ्वी की गति

change in seasons, solstice and equinox

Courtesy:studyandscore.com change in seasons

पृथ्वी की वो गति जिससे ऋतुएं बदलती हैं उसे परिक्रमण कहते हैं।
अर्थात पृथ्वी जब सूर्य की परिक्रमा करती है तो कभी सूर्य से दूर होती है तो कभी पास।
ऊपर के चित्र को ध्यान से देखिये। पृथ्वी अपनी धुरी पर बिलकुल सीधी  न होकर थोड़ी सेी  झुकी हुई है।
जब पृथ्वी के ऊपर का आधा हिस्सा सूर्य की तरफ झुका हुआ होता है (21 जून)
तो उस स्थान पर गर्मी का मौसम होगा।
वहीँ दूसरी ओर पृथ्वी के नीचे का आधा भाग (दक्षिणी गोलार्ध)
सूर्य की तरफ झुकी न होने की वजह से ठंडी होगी अर्थात
वहां जाड़े का मौसम होगा।
जून के बाद जब पृथ्वी जुलाई अगस्त पार करते हुए दिसंबर महीने में सूर्य के दूसरी ओर पहुँचती है
तो उत्तरी गोलार्ध में ठण्ड और
दक्षिणी गोलार्ध में गर्मी का मौसम होगा।

21 मार्च और 23 सितम्बर:

21 मार्च और २३ सितम्बर -

सूर्य की किरणे भूमध्यरेखा पर सीधी – (EQUINOX) 

21 मार्च और २३ सितम्बर को न तो उत्तरी और ना ही गाक्षिणी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका होता है।
इस वक़्त सूर्य की किरणे भूमध्यरेखा (O डिग्री EQUATOR) पर सीधी  पड़ती है।
इस वक़्त न ही उत्तरी गोलार्ध में और ना ही दक्षिणी गोलार्ध में ठण्ड या गर्मी पड़ेगी।
फरवरी -मार्च के महीने को भारत में चैत्र या बैसाख का महीना कहते हैं।
इसी वक़्त हम होली का त्यौहार मानते हैं क्योंकि न तो ठण्ड होती है और ना ही गर्मी होली और होलिका दहन मनाने के पीछे वैज्ञानिक कारण
उसी प्रकार २३ सितम्बर को पतझड़ का मौसम (AUTUMN) कहा जाता है।
भारत में इसे हेमंत ऋतु (PRI -WINTEर) भी कहते हैं।

पृथ्वी की गतियां पाठ में प्रयोग होने वाले तकनीकी शब्द:

अक्ष : पृथ्वी जिस काल्पनिक रेखा पर घूमती है, उसे अक्ष कहते हैं।
कक्ष : पृथ्वी जिस काल्पनिक रेखा पर चलकर सूर्य का चक्कर लगाती है, उसे कक्ष कहते हैं।
अक्ष का झुकाव :
 पृथ्वी पर दो सीधी  रेखाएं खींचिए।
एक बाएं से दाए और दूसरी ऊपर से नीचे।
पृथ्वी अपने अक्ष पर 23. 5 डिग्री झुकी हुई है।
इस रेखा को भी खींच लीजिये।
अब आप देखेंगे कि पृथ्वी का अक्ष (झुकी हुई रेखा) बाए से दाए खींची हुई रेखा से 66.5 डिग्री का कोण बनती है।
जबकि ऊपर से नीचे खींची हुई रेखा से 23.5 डिग्री का  कोण  बनती है। पृथ्वी का अपने अक्ष पर झुकाव है 23. 5 डिग्री।
अधिवर्ष (Leap year ): 
पृथ्वी द्वारा सूर्य की एक परिक्रमा करने के समय को एक पृथ्वी वर्ष कहती हैं।
इसमें पृथ्वी को 365 दिन और 6 घंटे लगते हैं।
हम अपनी सहूलियत के लिए एक वर्ष में 365 दिन ही मानते हैं। ब
चे हुए 6 घंटे चार वर्षों में 6 +6 +6 +6 =24 घंटे हो जाते हैं।
हर चार वर्षों में फरवरी महीने एक दिन जोड़कर इसे हम पूरा कर लेते हैं।
ऐसे साल को leap year कहते हैं जिसमे 366 दिन होते हैं।   

प्रदीप्ति वृत्त (लाइन ऑफ़ इल्लुमिनेशन): 

प्रदीप्ति वृत्त - (LINE OF ILLUMINATION)

बीच की वह रेखा जो अँधेरे और उजाले में फ़र्क़ करती है: प्रदीप्ति वृत्त  

एक गेंद और एक टोर्च लीजिये।  अँधेरे में टोर्च की रौशनी गेंद पर मारिये।
आप देखेंगे की आधी गेंद पे रौशनी है और आधी पे नहीं।
बीच की वह रेखा जो अँधेरे और उजाले में फ़र्क़ करती है ,
उसी रेखा को प्रदीप्ति वृत्त कहते हैं।
परिहेलियन (उपसौर):
सूर्य की परिक्रमा करते वक़्त पृथ्वी कभी सूर्य के निकर होती है तो कभी दूर।
वह बिंदु जहाँ पर पृथ्वी सूर्य से सबसे नज़दीक होती है  उसे परिहैलियन कहते हैं।
एपहेलियन (अपसौर ):
जिस बिंदु पर पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर होती है उसे परिहैलियन कहते हैं।
विषुव (EQUINOX):
21 मार्च और २३ सितम्बर - पृथ्वी की गतियां

सूर्य की किरणे भूमध्यरेखा पर सीधी- पृथ्वी की गतियां

21 मार्च और २३ सितम्बर को सूर्य की किरणे भूमध्य रेखा पर सीधी पड़ती हैं,
उस  दिन को विषुव कहते हैं।
इन दिनों दिन और रात की लम्बाई बराबर होती है।
अयनांत (SOLSTICE):
21 जून को सूर्य की किरणे सीधा कर्क रेखा पर पड़ती है।
जिससे उत्तरी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है।
इसी प्रकार 22 दिसम्बर को सूर्य की किरणे मकर रेखा पर सीढ़ी पड़ती है
जिससे दक्षिणी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है। इसी घटना को अयनांत कहते हैं।

छह महीने का दिन और छह महीने की रात:

21ST JUNE - LONGEAT DAY AND SHORTEST NIGHT IN N.HEMISPHERE- पृथ्वी की गतियां

     उत्तरी ध्रुव पर छह महीने का दिन

यह समझना आसान भी है और मुश्किल भी।
किताबों में हमने पढ़ा है कि पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर छह महीने का दिन और छह महीने की रात होती है।
ऐसा क्यों होता है ?
इसे समझने के लिए एक ग्लोब या एक बास्केट बॉल लीजिये।
बॉल के सबसे ऊपर की बिंदु पर एक बिंदी के साइज का कागज़ चिपका दीजिये।
ठीक उसी के सीध में नीचे भूमध्यरेखा पर एक और कागज़ का टुकड़ा चिपका  दीजिये।
तीसरा कागज़ का टुकड़ा बॉल के सबसे नीचे (दक्षिणी ध्रुव) पर चिपका दीजिये।
कमरे की लाइट बंद कर दीजिये। अब बॉल या ग्लोब पर सामने से टोर्च से रौशनी कीजिये।
आपको दो कागज़ के टुकड़ों पर रौशनी दिखाई पड़ेगी – ऊपर और बीचवाले पर।
धीरे धीरे बॉल या ग्लोब को घुमाइए।
आप देखेंगे कि बॉल के बीच में जो कागज़ का टुकड़ा है वो तो थोड़ी देर में पृथ्वी के पीछे अन्धकार में चला जाएगा।
लेकिन कागज़ का वो टुकड़ा जो बॉल के सबसे ऊपर है , पृथ्वी के एक चक्कर लगाने के बाद भी वह अँधेरे में नहीं जाता।
उसी प्रकार जो टुकड़ा सबसे नीचे लगा है उसपर भी रौशनी हैं जाती।
कारण यह है कि पृथ्वी के बीच का भाग बड़ा और मोटा है  लेकिन पृथ्वी का  ऊपरी और दक्षिणी भाग सिर्फ एक बिंदु है।
अब शायद आपको समझ आ गया होगा कि पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर छह महीने का दिन और छह महीने की रात क्यों होती है।

निष्कर्ष – पृथ्वी की गतियां

उम्मीद है आप सभी को पृथ्वी की गतियां पाठ आसानी से समझ में आ गया होगा।
इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें। अगर कोई चीज़ समझने में परेशानी हुई हो या आप कुछ और जानना चाहते हों तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में आप लिख सकते हैं।
आपके प्रश्नों का उत्तर आपको २४ घंटे के अंदर ही मिल जाएगा।
आइये , अब इस पाठ में दिए गए प्रश्नों को हल करते हैं।

पृथ्वी की गति – अभ्यास प्रश्नोत्तर 

प्रश्न १. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये ?
 
क) पृथ्वी के परिभ्रमण एवं परिक्रमण में अंतर बताइये ?
 
उत्तर : 
जब पृथ्वी अपने ही स्थान (अक्ष) पर घूमती है तो उसे परिभ्रमण (घूर्णन) कहते हैं।
इससे दिन और रात होते हैं। 
इसी प्रकार जब पृथ्वी सूर्य के चारों ऒर घूमती है तो उसे परिक्रमण कहते हैं।
इसकी वजह से ऋतुओं में परिवर्तन आता है। 
ख ) उत्तर और दक्षिण अयनांतो में अंतर बताइये ?
दक्षिणी गोलार्ध: ६ महीने लगातार दिन होता है- २२ दिसंबर -पृथ्वी की गतियां

पृथ्वी का दक्षिणी गोलार्ध सूर्य की तरफ झुका हुआ- दक्षिण अयनांत : पृथ्वी की गतियां

उत्तर:
उत्तत अयनांत 
i) जब पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य की तरफ झुका हुआ होता है तो इसे उत्तर अयनांत कहते हैं।
ii) ऐसी स्थिति में यहाँ 6 महीने लगातार दिन होता है।
iii) यह २१ जून को होता है।
दक्षिण अयनांत 
 
i) जब पृथ्वी का दक्षिणी गोलार्ध सूर्य की तरफ झुका हुआ होता है तो इसे दक्षिण अयनांत कहते हैं।
ii) ऐसी स्थिति में यहाँ ६ महीने लगातार दिन होता है।
iii) यह २२ दिसंबर  को होता है।
ग ) प्रदीप्ति-वृत्त से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए ?
उत्तर:
I) पृथ्वी का आकार (संतरे जैसा ) लगभग गोल है।
II) एक समय में इसके आधे भाग में ही सूर्य का प्रकाश पड़ता है।
III) सूर्य की ओर वाले भाग में दिन होता है तथा सूर्य के विपरीत भाग में रात होती है।
बीच की वह रेखा जो अँधेरे और उजाले में फ़र्क़ करती है , उसी रेखा को प्रदीप्ति वृत्त (LINE OF ILLUMINATION) कहते हैं।
घ) पृथ्वी की  घूर्णन गति के प्रभावों का विवरण दीजिए?
उत्तर:
पृथ्वी की घूर्णन गति के  प्रभाव के कारण :
i) दिन और रात होते हैं।
ii) सूर्य, चन्द्रमा, आकाशीय पिण्ड इत्यादि पूर्व दिशा से पश्चिम दिशा की ओर गति करते हुए प्रतीत होते हैं।
 

प्रश्न 2. कारण बताइए-


(क) उत्तरी व दक्षिणी ध्रुव पर छह माह का दिन होता है।
(ख) लीप वर्ष हर चौथे वर्ष में होता है।
(क) उत्तरी व दक्षिणी ध्रुव पर छह माह का दिन होता है।
कारण 
i) पृथ्वी अपने अक्ष पर साढ़े २३ डिग्री झुकी हुई है। 
ii) इस वजह से उसका उत्तरी हिस्सा लगभग छह महीने सूरज की ऒर झुका रहता है जिससे वहां छह महीने दिन होता है। 
iii) २१ मार्च से लेकर लगभग २२ सितम्बर तक यहाँ दिन ही रहता है। 
 
(ख) लीप वर्ष हर चौथे वर्ष में होता है।
कारण
i) पृथ्वी द्वारा सूर्य की एक परिक्रमा करने के समय को एक पृथ्वी वर्ष कहते हैं।
ii) इसमें पृथ्वी को 365 दिन और 6 घंटे लगते हैं।
iii) हम अपनी सहूलियत के लिए एक वर्ष में 365 दिन ही मानते हैं।
iv) बचे हुए 6 घंटे चार वर्षों में 6 +6 +6 +6 =24 घंटे हो जाते हैं।
v) हर चार वर्षों में फरवरी महीने में एक दिन जोड़कर इसे हम पूरा कर लेते हैं।
 ऐसे साल को LEAP YEAR  कहते हैं जिसमे 366 दिन होते हैं।

सही उत्तर चिन्हित कीजिए:

(i) पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की गति को कहा जाता है-

(क) घूर्णन
(ख) परिक्रमण
(ग) झुकाव

(ii) सूर्य की सीधी किरणें विषुवत वृत पर किस दिन पड़ती है-

(क) 21 मार्च
(ख) 21 जून
(ग) 22 दिसम्बर

(iii) गर्मी में क्रिसमस का पर्व कहाँ मनाया जाता है-

(क) जापान
(ख) भारत
(ग) आस्ट्रेलिया

(iv) ऋतुओं में परिवर्तन पृथ्वी की किस गति के कारण होता है-

(क) घूर्णन
(ख) परिक्रमण
(ग) गुरूत्वाकर्षण

खाली स्थान भरें।

I) एक लीप वर्ष में दिनों की संख्या 366 होती है।

II) पृथ्वी की प्रतिदिन की गति को पृथ्वी दिन कहते हैं।

III) पृथ्वी सूर्य के चारो ओर दीर्घवृताकार कक्षा मे घूमती है।

IV) 21 जून को सूर्य की किरणें कर्क रेखा रेखा पर सीधी पड़ती है।

V) शरद  ऋतु में दिन छोटे होते हैं।

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