गोंड प्रजाति में सती प्रथा: जो TEXT BOOKS में नहीं पढाई जाती

Written By Avinash Sharan

10th February 2022

गोंड प्रजाति से सीखें सती प्रथा का सही अर्थ

सती प्रथा का नाम सुनते ही ह्रदय कांप उठता है ? आँखों के सामने एक बेबस महिला की तस्वीर उभर आती है जिसे पति के मरने के बाद उसके साथ ही ज़िंदा जला दिया जाता था। ऐसी ही महिला को सती की उपाधि दी जाती थी। बस, इतना ही पढ़ा और सुना होगा आपने। क्या यही थी सती प्रथा ? सती प्रथा हिन्दू धर्म में व्याप्त एक बुराई है। मगर क्या आप जानते हैं यूरोपीय देशो में सती प्रथा से भी खतरनाक एक प्रथा प्रचलित थी।  इसे “Witch Hunting” कहते थे। मगर क्या आप जानते हैं गोंड प्रजाति में यह  प्रथा किस प्रकार मनाई जाती थी ? इस लेख के माध्यम से जानिये विश्व के अलग अलग हिस्सों में सती प्रथा कैसे मनाई जाती थी।  आपको पढ़कर आश्चर्य होगा कि गोंड समुदाय की प्रथा सबसे व्यावहारिक थी।

क्या है Witch Hunting:

यूरोप में किसी महिला के पति की मृत्यु के पश्चात् उसके ऊपर जादू -टोना करने के आरोप में उसे जिन्दा जला दिया जाता था। इतिहासकारों के अनुसार,सन 1450 से 1750 ईस्वी तक 40000 से 100000 महिलाओं को मौत के घाट उतार दिया गया। विधवा महिलाओं कोअशुभ, बुरी आत्मा, मानकर उन्हें खदेड़ कर मार दिया जाना ही  witch-hunts कहलाता था। सामाजिक विज्ञान के शिक्षकों को सती प्रथा पढ़ाते समय कक्षा में इस बात को भी अवश्य बताना चाहिए https://dopolitics.in/rti-sati-pratha-india-history-ncert-unable-to-provide-details/

भारत में इस प्रथा की शुरुआत:

भारत में सती प्रथा को सती नाम देवी दाक्षायणी से मिला। पौराणिक कथाओं के अनुसार पिता द्वारा पति भगवन शिव को अपमानित  करने पर उन्होंने अग्नि में कूदकर आत्मदाह कर लिया था। यहाँ एक बात जानना जरूरी है कि आत्मदाह का कारण पति का अपमान था न कि पति की मृत्यु। लेकिन बाद में समाज के कुछ ठेकेदारों ने इसे सती प्रथा से जोड़ दिया  the-origin-of-the-practice-of-sati

अमेरिका के Natchez प्रजाति में प्रथा:

सती प्रथा से मिलती जुलती प्रथा उत्तरी अमेरिका के Natchez प्रजाति में भी पायी जाती थी। इस प्रथा के अनुसार पति के मरने के पश्चात, उसके शरीर के साथ पत्नी को भी दफना दिया जाता था। और पत्नी की मृत्यु के पश्चात, उसके साथ उसके पति को भी दफना दिया जाता था। यहाँ एक बात जानना जरूरी है कि सिर्फ पत्नी ही नहीं बल्कि पति को भी सती होना पड़ता था The suttee in North America

ऋग्वेद में सती प्रथा:

ऋग्वेद में सती प्रथा को बढ़ावा देने का उल्लेख कहीं भी नहीं मिलता है। इसी बात को राजा राम मोहन रॉय ने भी साबित किया था। अथर्व वेद के एक श्लोक 18 . ३. १. में वर्णन है कि सती प्रथा की औपचारिकता के रूप में पत्नी को पति की चिता पे साथ में लेटना पड़ता था। इसके पश्चात, उनके सम्बन्धी उससे उठने का आग्रह करते थे। तत्पश्चात, वह अपने बच्चों और सम्बन्धियों के साथ सम्मानित ज़िन्दगी व्यतीत करती थी। वेदों में सती प्रथा का तो नहीं बल्कि विधवा विवाह की बात जरूर कही गयी है vedic-reference-to-sati.

रामायण और महाभारत काल में इस प्रथा का वर्णन :

क्या राजा दशरथ की मृत्यु के पश्चात उनकी पत्नियां सती हुई थीं ? क्या रावण की मृत्यु के पश्चात मंदोदरी सती हुई थी ? और क्या महाभारत काल में अभिमन्यु और घटोत्कच की मृत्यु के बाद उनकी पत्नियां सती हुई थी ? नहीं। इससे साफ़ पता चलता है कि रामायण और महाभारत काल में भी सती प्रथा का प्रचलन नहीं था। बहुत अधिक  गहराई में जाने पर एक्का-दुक्का घटनाओं का पता चलता है hindi.webdunia.com/my-blog/tradition-of-sati

कहाँ से आयी भारत में यह प्रथा:

७वीं शताब्दी से लेकर ११वीं शताब्दी तक सती प्रथा का उल्लेख भारत में सबसे अधिक मिलता है। ऐसा नहीं है कि उस वक़्त भारत में मूर्खों की कमी थी। धार्मिक अंध विश्वास ने इस अमानवीय प्रथा को लोकप्रिय बनाया। समाज में ऐसी-ऐसी बातें फैलाई गयी जिससे सती प्रथा ज़ोर पकड़ने लगी। सती प्रथा का प्रचलन प्रारम्भ  में क्षत्रियो में ही था। देश में बाहरी ताकत और आक्रमणों की वजह से महिलाओं की सुरक्षा भी इसका एक प्रमुख कारण रही है। अपने आप को दुश्मनों के हवाले करने की बजाय राजपूत महिलायें  जोहर (सामूहिक आत्मदाह ) करना ज्यादा पसंद करती थीं। हालाँकि दक्षिण भारत में ये प्रथा लोकप्रिय नहीं हुई।

गोंड समुदाय में सती प्रथा:

सती प्रथा को अगर हमें सही मायने में समझना है तो गोंड समुदाय से समझना चाहिए। गोंड समुदाय की सती प्रथा बहुत ही व्यावहारिक है। इस प्रथा के अनुसार, अगर किसी स्त्री के पति की मृत्यु हो जाती है, तो वह स्त्री अपने पति के चिता के पास हाथो में जलती हुई लकड़ी लेकर खड़ी हो जाती है।

चिता का पहला चक्कर:

चिता का पहला चक्कर लगाते हुए अपने बेटों से पूछती है, मेरा पति अब नहीं रहा। क्या तुमलोग मेरी ज़िम्मेदारी लेने  को तैयार हो ? अगर बेटों ने कुछ नहीं कहा तो वह दूसरा चक्कर लगाती है।

चिता का दूसरा चक्कर:

दूसरे चक्कर में वो अपनी बेटी और दामाद से यही प्रश्न पूछती है। कोई जवाब न मिलने पर वह तीसरा चक्कर लगाती है।

चिता का तीसरा चक्कर:

तीसरे फेरे में वह गाँव के अन्य लोगों से प्रश्न करती है ? जब गाँव के लोग भी इंकार कर  देते हैं तो वह चौथा चक्कर लगाती है।

चिता  का चौथा चक्कर:

इस बार वो गाँव के मुखिया से  प्रश्न करती है ? जब गाँव का मुखिया  भी इंकार कर  देता हैं तो वह पांचवा चक्कर लगाती है।

चिता  का पांचवां चक्कर:

पांचवें चक्कर में वो गाँव के पुरोहितों से प्रश्न करती है। इस प्रकार वो समाज के हरेक वर्ग से पूछती है। जब कोई भी उसकी जिम्म्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता है तो वह पति की चिता को आग देती है और गाँव छोड़कर पास के किसी छोटे से मंदिर में निवास करने लगती है। गोंड प्रजाति में ऐसी महिला को सती कहा जाता है।

सती प्रथा : निष्कर्ष

आठवीं कक्षा की सामजिक विज्ञानं  पुस्तक के एक पाठ में सती प्रथा को हिन्दू धर्म में व्याप्त एक बुराई के रूप प्रस्तुत किया गया है। NCERT के अनुसार ”  In some parts of the country, widows were praised if they chose death by burning themselves on the funeral pyre of their husbands. Women who died in this manner, whether willingly or otherwise, were called “sati”, meaning virtuous women. Women’s rights to property were also restricted. Class VIII Lesson Plan Of Social Science – Why Is It So Famous? Besides, most women had virtually no access to education. In many parts of the country people believed that if a woman was educated, she would become a widow.”Class VIII Human Resources Lesson Plan That May Change Your Perspective इस पर विवेक पांडेय जी ने NCERT से RTI के तहत जब इसके ठोस सबूत मांगे तो NCERT का जवाब इस लिंक पर क्लिक कर के पढ़ सकते हैं https://dopolitics.in/rti-sati-pratha-india-history-ncert-unable-to-provide-details/। क्या आपको लगता है सामाजिक विज्ञान की  NCERT पुस्तकों में कुछ बातें गलत लिखी गयी हैं ? अपनी राय COMMENT BOX में अवश्य लिखें।

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