नरेंद्र मोदी

Written By Avinash Sharan

8th May 2020

नरेंद्र मोदी – नए भारत का प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी

                 नरेंद्र मोदी

दुनिया के टॉप १० सबसे ज्यादा पॉपुलर व्यक्तियों की सूची में एक नाम आता है – नरेंद्र मोदी

कर्मठ, दृढ़ निश्चयी , ईमानदार, हिम्मती, दूरदर्शी और सशक्त मनोबल वाला प्रधानमंत्री जिसने इतने कम समय में पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना ली।

भारत को भी एक अलग मुकाम तक पहुँचा दिया।

नरेंद्र मोदी दिलदारों के लिए दिलदार और आतंक फ़ैलाने वालों के लिए https://shapingminds.in/पाकिस्तान-अब-चाइना-को-गधे/ एक खतरनाक व्यक्ति हैं।

अपने आत्मसंम्मान के लिए ज़रुरत से ज़्यादा गिरना या तलवे चाटना इन्हें पसंद नहीं।

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अगर भारत का विकास नहीं हुआ तो इसे भारत का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा।

आधुनिक भारत में ऐसे सिर्फ दो ही व्यक्ति हुए हैं जिन्हें दुनिया सलाम करती है- डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम और नरेंद्र मोदी

नरेंद्र मोदी की पहली लड़ाई अपनों से :

भारत के प्रधानमंत्रियों की लिस्ट में नरेंद्र मोदी का नाम जुड़ते ही खलबली मच गयी।

खुद भाजपा के लोग नाराज़ हो गए।

कुछ लोग ये तो चाहते थे कि चुनाव में भाजपा जीते, मगर ये कभी नहीं चाहते थे कि नरेंद्र मोदी प्रधानमन्त्री बने।

कारण था पार्टी में कुछ लोगों की मानसिकता।

भारत जैसे देश में कुछ लोग आज भी गुणों से ज्यादा जाति को महत्त्व देते हैं।

शायद ऐसा ही कुछ सरदार पटेल के साथ भी हुआ होगा मगर गांधीजी के साथ नहीं हुआ क्योंकि वो कोई पद नहीं चाहते थे।

जो कॉम्पिटिटर नहीं है उनसे कैसा विरोध ?

लेकिन मानना पड़ेगा मोदी जी को।

एक -एक करके सारे पुराने लोग और पुरानी मानसिकता वाले लोग दूर होते गए और आपका रास्ता साफ़ होता गया।

मोदी जी की दूसरी लड़ाई धर्म से :

एक तो मोदी जी भाजपा से और उसपर से हिन्दू।

इसे कहते हैं एक तो करेला उसपे नीम चढ़ा। भारत में हिन्दू होना सबसे बड़ा गुनाह है।

हिन्दू होने की वजह से देश के २५ प्रतिशत लोग आपसे नफरत करने लगे और उनके अंदर ज्वालामुखी के बुलबुले फूटने लगे।

पहले लोग चुनाव में पार्टी का विरोध करते थे।

एक पार्टी दू सरे पार्टी का विरोध करती थी। मगर २०१४ का चुनाव हुआ सभी पार्टी VS मोदी।

उसपर भी आप जीत गए तो नफरत तो फैलना ही था।

तीसरी लड़ाई आतंकवाद से :

प्रधानमन्त्री बनकर आपने आतंकवादियों के ठिकाने को नष्ट कर दिया। विपक्षियों का खून खौलने लगा।

जिस समस्या को विपक्षी इतने वर्षों से पाल रहे थे, आपने एक झटके में उसे समाप्त कर दिया और सारा श्रेय भी ले गए।

ये तो विपक्ष के साथ आपने अन्याय कर दिया।

विपक्ष आपसे सबूत नहीं मांगता तो और क्या करता ?

आपने काम ही ऐसा किया कि विपक्ष की बोलती ही बंद करा दी।

चौथी लड़ाई भ्रष्टाचार से :

आप रात को आठ बजे चुपके से आते हैं और कहते हैं ५०० और १००० के नोट बंद।

ये तो हद हो गयी। ऐसे फैसले लेने से पहले संसद में चर्चा होनी चाहिए थी।

विपक्ष के लोगों को बता देना चाहिए था ताकि वे अपना-अपना पैसा बैंकों में जमा कर लेते।

आपने तो कई लोगों को  दिवालिया कर दिया।

आतंकवादियों की फंडिंग भी बंद हो गयी। भ्रष्टाचार, आतंकवादी और काला धन से हमारा बहुत पुराना रिश्ता है।

आप सभी रिश्ते तोड़ते जा रहे हैं।

जितना आप इन पुराने रिश्तों को तोड़ते जा रहे हैं उतना ही विपक्ष का गठबंधन https://shapingminds.in/पप्पू-का-महा-गठबन्धन/ मज़बूत होता जा रहा है।

आप अगर ऐसे हर काम इनके उम्मीद के विपरीत कीजियेगा तो इनका मनोबल तो टूटेगा ही।

भले ही दुनिया आपको सलाम करे मगर भारत में तो आपके विरोधी बढ़ते ही जाएंगे ।

मोदी जी की पांचवी लड़ाई कश्मीर से :

हे भगवान् , इतना खूबसूरत राज्य नेहरू जी ने आर्टिकल ३७० की लग्घी लगाकर फंसाया था।

वहां सरदार पटेल तक को नहीं जाने दिया और आपने इतनी आसानी से आर्टिकल ३७० हटा दिया।

बड़े निर्दयी हैं आप।

लोगों ने कश्मीरी पंडितों को इसलिए मार भगाया ताकि कश्मीर पे उनका वर्चस्व रहे लेकिन

आपने तो उनके मुँह  का कौर छीन लिया।कम से कम कश्मीर तो छोड़ देना चाहिए था।

छठी लड़ाई चोरों से :

ये लो, आप भ्रष्टाचार ख़त्म करना चाहते हैं और यहाँ पूरा विपक्ष आपस में मिलकर आपको ही चोर कह रहा है।

आप ये क्यों नहीं समझते कि प्रधानमन्त्री का काम है सबको लेकर चलने का, आप अकेले ही सारा क्रेडिट ले जाते हैं।

कुछ तो मनमोहन जी से सीखना चाहिए आपको।

ये अच्छा थोड़े ही लगता है जब सारे चोर चोर मौसेरे भाई मिलकर आपको चोर कहते हैं।

अगर आप इतना अच्छा काम कीजियेगा तो दूसरों को परेशानी तो होगी ही।

क्योंकि उन्हें भी अब उतना काम करना पड़ेगा जिसकी कि उन्हें आदत नहीं है।

दूसरों का काम बढ़ेगा तो गाली तो पड़ेगी ही।

Please do not disturb the work culture in India.

सातवीं लड़ाई मंदिर मस्जिद से :

जिन मामलों को विपक्ष उलझा कर रख रहा था इतने वर्षों से, आपसे किसने कहां इन मामलों को सुलझाने के लिए।

आपने तो मंदिर मस्जिद का मसला भी समाप्त कर दिया और वो भी शांतिपूर्वक।

आखिर आप चाहते क्या हैं ?

आप दूसरों को क्यों निकम्मा साबित करने में लगे हुए हैं।

जिस काम को कांग्रेस की सरकार ७० वर्षों में नहीं कर पायी उस काम को इतनी जल्दी करने की क्या आवश्यकता थी।

ऐसे तो विपक्ष के एक एक नेता की पोल खुल जायेगी।

उन्हें अपने इतने वर्षों के काम का हिसाब देना पड़ेगा, कहाँ से दे पाएंगे बेचारे ?

आठवीं लड़ाई अमीरों से :

आपको लोगों ने इसलिए वोट देकर जिताया क्योंकि उन्हें लगा कि ये तो सूट-बूट वाली सरकार है, हमारा ध्यान रखेगी।

ये क्या आपने तो उल्टा GST लाकर इनके सपनों पर पानी फेर दिया। टैक्स की चोरी भी बंद करवा दी।

ये तो अमीरों के साथ और व्यापारियों के साथ धोखा हुआ है।

लोग कहने लगे , पहले की ही सरकार अच्छी थी।

चोरी करती भी थी और करने भी देती थी।

नवमी लड़ाई बदनामी से :

ना आप पैसा खाते हैं ना खाने देते हैं।

आपने विपक्ष के लिए तो कोई मुद्दा छोड़ा ही नहीं।

उनसे कश्मीर, आतंकवादी , काला धन , भ्रष्टाचार सब छीन लिया।

अब बेचारों के पास बच गयी आपकी  पर्सनल लाइफ।

कोई कहता है आपने गोधरा काण्ड करवाया, कोई कहता है आपने शादी करके पत्नी को त्याग दिया ,

कोई कहता है कि आप अपने रिश्तेदारों को फायदा पहुँचा रहे हैं इत्यादि।

विपक्ष के लिए आपको नीचा दिखाना आवश्यक हो गया है।

वे जानते हैं कि अभी नहीं तो कभी नहीं। कम से कम ऐसी अफवाहों से तो डरिये क्योंकि इसके बाद विपक्ष के पास अब और कुछ नहीं बचा।

आखिर झूठा इल्जाम भी कितना लगाएंगे ?

दसवीं लड़ाई नागरिकता क़ानून से :

अब बर्दाश्त के बाहर हो गया। जो लोग काना फूसी  करके किसी तरह अपने को संभाले हुए थे उनसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा।

अब तो वो अपनी असलियत खुलकर दिखा रहे हैं।

बांग्लादेश और अन्य देशों से लोग इतने आराम से भारत में घुसकर खा-पी रहे थे, अब आप उन्हें भी भगाना चाहते हैं।

ये ज़रूरी तो नहीं कि भारत का आदमी अपने आप को भारतीय साबित करे।

आप ये क्यों नहीं मान लेते कि भारत में रहनेवाले सभी भारतीय हैं।

भारतियों  की सुरक्षा के लिए ये कानून भारतवासियों को नहीं चाहिए। क्या आपने कभी सोचा है कि वो बेचारे भाड़े के टट्टू आखिर कहाँ जाएंगे ?

ग्यारहवीं लड़ाई कोरोना से :

अब तो लोगों ने सोच लिया है किअकेला मोदी क्या करेगा? चलो हमसब मिलकर इस बीमारी को फैलाएं। विपक्ष ने अपनी रणनीति बदल ली है।

एक और बीमारी फ़ैलाने वालों को शह दे रही है तो दूसरी और से मोदी को बीमारी रोकने में नाकाम साबित करने में लगी हुई है।

यही है भारत और ऐसा है भारत।  आज दुनिया देख रही है मगर बेशर्मों को सिर्फ अपनी पड़ी है।

कहीं हम भी ऐसे ही तो नहीं होते जा रहे हैं ?

इस प्रकार विपक्ष अपनी भूमिका निभा रही है और एक व्यक्ति डॉक्टरों , नर्सों , पुलिसकर्मियों ,फौजियों और सफाई कर्मियों का उत्साह बढ़ाने में दिन रात लगा हुआ है। 

जय हिन्द।

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